Convict (Hindi)
For the English definition of "Convict", click here.
अपराधी संज्ञा उस व्यक्ति का वर्णन करती है जो किसी दंडनीय अपराध में दोषी पाया गया हो, और जिसका जुर्म कानूनी मुकदमें या "दोष स्वीकृति" या "कोई उम्मीदवारी नहीं" में सिद्ध किया गया हो।
अंग्रेजी में इसको "कन्विक्ट" बोलते हैं, जो संज्ञा और क्रिया दोनों है। क्रिया के रूप पे कन्विक्ट करने का मतलब होता है अधिकारक रूप में अपराधी घोषित करना, जब कोई एक मुकदमें या "दोष स्वीकृति" या "कोई उम्मीदवारी नहीं" वाले कानूनी मामले में दोषी पाया गया हो।
आधिकारिक परिभाषा
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो द्वारा प्रकाशित जेल सांख्यिकी भारत रिपोर्ट २०२१ की परिभाषा में, एक अपराधी ऐसा कैदी है जिसका जुर्म न्यायलय में सिद्ध किया गया हो, और जो दण्डित होकर जेल में सज़ा काट रहा हो। [1]
मॉडल जेल मैनुअल की परिभाषा में “अपराधी एक कैदी है जो ऐसे न्यायलय के निर्णय से जेल में सज़ा काट रहा है जिसके पास आपराधिक अधिकार और कोर्ट मार्शल का अधिकार है। इसमें वो व्यक्ति भी शामिल है जो आपराधिक प्रक्रिया संहिता १९७३ के अध्याय VIII और कैदी अधिनियम १९०० के नियमों के तहत जेल में गिरफ्तार किया गया है।”[2]
श्याम नारायण पांडे विरूद्ध उत्तर प्रदेश राज्यके मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने “अपराधी” की परिभाषा ऐसे दी थी की “जिसको"न्यायालय के निर्णय द्वारा दंडनीय अपराध का दोषी घोषित किया गया। यह घोषणा तब की जाती है जब अदालत उसे उन आरोपों का दोषी पाती है जो उसके खिलाफ सिद्ध हुए हैं।” [3]
दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) अपराधी की औपचारिक परिभाषा नहीं देती , लेकिन यह एक अपराधी के अधिकारों से संबंधित अलग-अलग उपलब्धियाँ अदा करती है।
- दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ४३२ राज्य सरकारों को अपराधियों को छूट देने की अनुमति देती है। प्रावधान में कहा गया है कि "जब किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए दंड दिया गया हो, तो उपयुक्त सरकार किसी भी समय, बिना किसी शर्त के या ऐसी किसी भी शर्त पर जिसे दंडित व्यक्ति स्वीकार करता है, उसकी सज़ा के पालन को जारी करने से पीछे हट सकती है या उस दंड के पूरे या किसी भाग को जिसके लिए उसे दंडित किया गया है, माफ कर सकती है"।[4]
- दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ४३३ राज्य और केंद्र सरकार को किसी अपराधी की सजा को परिवर्तित करने का अधिकार देती है। जहां छूट देने का अधिकार सिर्फ दंड के मुद्दत में बदल ला सकता है, उसके स्वरुप में नहीं, परिवर्तन का अधिकार दंड के स्वरुप को बदल सकता है और उसे काम कठोर सज़ा बना सकता है।
- दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ३७४ अपील के अधिकार से संबंधित है। अपराधी घोषित करने के बाद, दोषी व्यक्ति इस निर्णय को उच्च न्यायलय में चुनौती दे सकता है।
- दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ३८९(१) और (२ ) उस परिस्थिति से संबंधित है जहां एक दोषी व्यक्ति आपराधिक अपील दायर करने के बाद अपीलीय न्यायालय से जमानत प्राप्त कर सकता है। धारा ३८९ (३ ) उस परिस्थिति से संबंधित है जहां विचारण न्यायालय स्वयं दोषी आरोपी को अपील करने में सक्षम बनाने के लिए जमानत दे सकता है।[5]
जबकि कैदी अधिनियम के भाग ६ -ए, धारा ३१-ए और ३१-बी[6] किसी अपराधी के लिए पैरोल और फर्लो व्यवस्थाओं को परिभाषित करने से संबंधित हैं। जब कोई व्यक्ति दोषी ठहराया जाता है, तो वह पैरोल/फर्लो और छूट की अर्ज़ी देने लिए योग्य हो जाता है। । पैरोल और फर्लो दोनों कैद से कुछ समय तक की ही रिहाई देते हैं, पर पैरोल केवल एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए दी जाती है। एक कैदी सजा के न्यूनतम वर्षों की सेवा करने के बाद फर्लो की अर्ज़ी देने का अधिकार पाता है।"फर्लो" और "पैरोल" के दो अलग-अलग उद्देश्य हैं। कैदी को फर्लो पर रिहा करते समय कारण बताना आवश्यक नहीं है, लेकिन पैरोल के मामले में कारण बताना अनिवार्य है।
आधिकारिक डेटाबेस में उपस्थिति
जेल सांख्यिकी रिपोर्ट
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो द्वारा तैयार जेल सांख्यिकी रिपोर्ट (२०२१) जेलों का वार्षिक सांख्यिकीय विश्लेषण करती है। इसमें विभिन्न श्रेणियों के जेल कैदियों- जैसे दोषी, विचाराधीन, नजरबंद, और उनकी आयु और लिंगसंबंधित सांख्यिकीय जानकारी शामिल है।अपराधी कुल कैदियों का २२.२% हिस्सा हैं।[7] रिपोर्ट में जेल के कैदियों के सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर डेटा प्रस्तुत किया गया है, जिसमें अपराधी भी शामिल हैं।
शिक्षा
देश की विभिन्न जेलों में बंद १,२२,८५२ अपराधियों में से कुल ३०,८९४ अनपढ़ और ५२,५४२ अपराधी दसवीं कक्षा से नीचे शिक्षित बताए गए। ये दो श्रेणियां क्रमशः कुल अपराधियों(१,२२,८५२ ) का २५.१% और ४२.८% हिस्सा थीं।[7]
अधिवास
देश की विभिन्न जेलों में बंद १,२२,८५२ अपराधी-कैदियों में से, 1,14,696 अपराधी -कैदी संबंधित राज्यों के हैं जो सभी कैदियों का ९३.४% हिस्सा है।[7]
आयु-वर्ग
३०-५० वर्ष आयु वर्ग के कैदी अन्य किसी भी आयु वर्ग के कैदियों की तुलना में अधिक (६२,८६८ ) थे।[7]
इन से जुड़ा अनुसंधान
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (भारत न्याय रिपोर्ट) अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय आवधिक रिपोर्ट है जो न्याय देने की राज्यों की क्षमता को क्रम में रखती है। यह जेलों के संबंध में सांख्यिकीय जानकारी प्रस्तुत करती है और रिपोर्ट जिन समस्याओं पर प्रकाश डालती है उन से अपराधी प्रयत्यक्ष झूझ रहे हैं। भीड़भाड़, जगह की उपलब्धता, और व्यावसायिक प्रशिक्षण की कमी जैसी समस्याएं अपराधियों की जीवन स्थितियों को सीधे प्रभावित करती हैं।
सामाजिक-आर्थिक जानकारियाँ
कल्याण योजनाएं
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने एक विशेष योजना शुरू करने का निर्णय लिया है 'गरीब कैदियों के लिए सहायता'। ये उन गरीब लोगों को आर्थिक सहायता देने के लिए है जो जुर्माना या जमानत राशि का भुगतान न कर पाने के कारण जेलों में बंद हैं।[9]
समान शब्द
विचाराधीन, नजरबंद और अपराधी के बीच भ्रमित होना आसान हो सकता है। विचाराधीन शब्द उन लोगों के लिए है जिनका वर्तमान में किसी न्यायालय में परिक्षण चल रहा है , इसलिए, वे या तो अपराधी ठहराए जा सकते हैं या बरी हो सकते हैं। यदि दोषी सिद्ध होते हैं , तो अपराधियों के वर्ग में दर्ज किये जाते हैं। नजरबंद वह व्यक्ति है जिसे कानूनी तौर पर हिरासत में रखा गया है। इसका अर्थ है कि उन पर अभी तक किसी अपराध का आरोप नहीं लगाया गया है। इन दो परिभाषाओं के विपरीत, एक अपराधी वह व्यक्ति है जिसे किसी अपराध का दोषी पाया गया है और किसी न्यायालय द्वारा दंडित किया गया है।
संदर्भ
- ↑ Ministry of Home Affairs, National Crime Records Bureau “Prison Statistics India” (2021), available https://ncrb.gov.in/en/prison-statistics-india-2021
- ↑ Bureau of Police Research and Development, "Model Prison Manual for Superintendence and Management of Prisons in India", Ministry of Home Affairs https://bprd.nic.in/WriteReadData/userfiles/file/5230647148-Model%20Prison%20Manual.pdf
- ↑ Shyam Narain Pandey v. State of U.P., (2014) 8 SCC 909 https://indiankanoon.org/doc/27278381/
- ↑ Section 433, Code of Criminal Procedure 1973https://indiankanoon.org/doc/1275473/
- ↑ Sri M. Sreenu, “BAIL, ANTICIPATORY BAIL, MANDATORY BAIL & BAIL AFTER CONVICTION”, available https://districts.ecourts.gov.in/sites/default/files/6-Bail%20Anticipatory%20Bails%20-%20Sri%20M%20Sreenu.pdf
- ↑ Prisoners Act, 1900https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/11092/1/the_prisoners_act_1900.pdf
- ↑ 7.0 7.1 7.2 7.3 National Crime Records Bureau, “Prison Statistics India 2021”, available at https://www.ncrb.gov.in/prison-statistics-india-year-wise.html?year=2021&keyword=
- ↑ 8.0 8.1 8.2 Prison Statistics of India, <https://www.ncrb.gov.in/uploads/nationalcrimerecordsbureau/post/1696317373PSI-2021.pdf>
- ↑ Express News Service, “Govt launching scheme to help poor pay bail amount, leave jail”, Indian Express available <https://indianexpress.com/article/india/govt-launching-scheme-to-help-poor-pay-bail-amount-leave-jail-8544832/>